शाहजहांपुर से शशांक भारती की कविता – एक सवाल ?

समसामयिक विषय पर कविता

एक सवाल ॽ

नारी
कभी द्रौपदी
कभी गांधारी
कहीं लक्ष्मी
कहीं भवानी
पीछे पड़ती
कभी सत्ता
कभी राजनीति
तो कभी
पुरुष की मानसिकता
जी हाँ
रामायण काल हो
वैदिक महाभारत
मुगल या ब्रिटिश साम्राज्य
उसके चीर हरण के
प्रयास हुए किए गए
कभी मन के
तो कभी तन के
जी हाँ
अपने अस्तित्व के लिये
अपनों के प्रभुत्व के लिए
ऐसा ही कुछ दिखा
वर्तमान राजनीति में
एक बार फिर
अपने के द्वारा
अपने अस्तित्व के लिये
राखी के बन्धन को
भुलाकर
मर्यादा को तार तार कर
जी हाँ
दशकों के विश्वास की हत्या कर ।
प्रश्न उठना स्वाभाविक है
कि हम कहां जा रहे हैं
कहां पर है हमारा समाज
और
समाज के चिन्तक
हर छोटी बड़ी बात पर
हो हल्ला मचाने वाले
बड़े बड़े मंचों पर
नीति और नीयत
की बात रखने वाले
जबाब कौन देगा ॽ
जी हाँ प्रश्न इन सबसे
जबाब कौन देगा ॽ
जबाब न मिलना
कहीं इतिहास का जबाब न बन जाए
और
बदल जाये
पुरुषत्व की परिभाषा।
इसलिए
जबाब आवश्यक है
वह भी समय से
नारी के लिए
उसके अस्तित्व के लिये
समाज और देश के लिए
उन सभी के लिए
जिनका आधार है नारी
अभिमान है नारी
स्वाभिमान है नारी ।

मौलिक स्वरचित
शशांक मिश्र भारती
शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश

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