धमतरी से डॉ. शैल चन्द्रा की लघुकथा – इमोजी

लघुकथा-
“इमोजी”

आज वह बहुत खुश थी। आज उसका एम्.ए. का रिजल्ट आया था।वह प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुई थी। विवाह के बाद भी उसने अपनी पढाई जारी रखा हुआ था,यह उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण बात थी।
उसने अपना रिजल्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया। पहले उसने अपने भैया को व्हाटस् एप किया।इसके पूर्व भी जब भी उसकी कोई छोटी -मोटी रचना किसी पत्रिका में छपती या कोई महत्वपूर्ण बात होती तो वह अपने भैया को व्हाटस् एप करती तो झट से उधर से ठेंगा दिखाता हुआ या तीन ऊँगली पर दाद देता हुआ इमोजी प्रकट हो जाता। पहले इन इमोजी को देख वह प्रसन्न हो उठती पर कभी कोई कमेंन्ट नहीं आने पर उसे दुःख भी होता। आज उसे लगा कि उसकी इस शानदार सफलता पर भैया चंद लाइन जरूर कमेंन्ट करेंगें।पर आज भी ठेंगा दिखाता हुआ इमोजी ही भेजा गया था।
लगातार चार सालों से भैया उससे केवल इमोजी की भाषा में बातें कर रहे है फोन पर हाँ,हूँ या कभी-कभी फोन नहीं उठाते ।उनकी ओर से फोन नहीं आता।
वह सोचती शायद लोगों के पास अब समय के साथ -साथ भाषा की कमी भी होते जा रही है।तभी तो लोग अब इमोजी की भाषा बोलने लगे हैं।
जब से उसकी शादी हुई है लगता है भैया-भाभी ने उससे मुक्ति पा लिया है ।तभी तो कभी भी उससे नहीं बतियाते हैं।वह अपनी भावनाएं कल्पनाएं उनसे अभिव्यक्त करना चाहती है। जी भर कर बतिया कर अपने को हल्का कर लेना चाहती है।पर उनके पास शायद समय नहीं है या सवेंदनाएँ ? वह समझ नहीं पाती।
आज भी भैया ने दाद देता हुआ इमोजी सेंड किया है। वह इन इमोजी को देख -देख कर बोर हो चुकी है। उसे बहुत दुःख हुआ।उसकी आँखें डबडबा गईं। उसने भी अपने भैया को एक इमोजी सेंड किया। एक रोती हुई गुड़िया की।
आश्चर्य भाई ने पुनः दाद देता हुआ इमोजी सेंड किया। उसने छलकते आंसुओं को पोंछते हुए अपना मोबाइल बंद कर दिया और अपनी आँखे बंद ली। उसे लगा कि वह स्वयं भी एक इमोजी बन चुकी है।
डॉ. शैल चन्द्रा
रावण भाठा, नगरी
जिला-धमतरी
छत्तीसगढ़

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