महासमुंद से महेश राजा की लघुकथा – भ्रष्टाचार

लघुकथा
भ्रष्टाचार

ट्रेन मंथर गति से चल पडी।रोजाना अपडाउन करने वाले यात्री एक साथ स्लीपर मे बैठे गप शप कर रहे थे।उनके ठहाकों से बोगी गूंज रही थी।
तभी अगले स्टेशन पर सप्लाई चेकिंग वाले टीटी आये।कुछ लोगो को फाईन भी किया।
वे प्राईवेट फर्म मे थे।चिढ गये।उन्होंने भ्रष्टाचार की बात कर बहस शुरू कर दी।
सारा सिस्टम ही गडबड है।अफसरशाही बंद होनी चाहिये।देश को गर्त की ओर ले जा रहे है ये लोग।
एक पत्रकार मित्र भी थे।उन्होंने बात आगे बढायी,ईन्हें भ्रष्ट करने वाले कौन है;आप ,हम और व्यापारी वर्ग ही न।
यह मत भूलिए कि अफसर भ्रष्ट है तभी व्यापारियों का गुजारा है।
तभी अचानक ट्रेन रूक गयी।शहर आ गया था।सब चल पडे ,रोजी रोटी के जुगाड़ मे।
वह भी इनके साथ था।जानता था।शाम को वापसी मे ट्रेन में यह सब मिलेंगे और बाते होगी किसी अन्म मुद्दे पर।यह रोज का ही काम था।

*महेशराजा.
वसंत.51,कालेज रोड।
महासमुंद।छत्तीसगढ़।

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