Devendra Soni April 16, 2019

*दोहा छंद :- मतदान*
1.
हार जीत के लग रहे, जहाँ, तहाँ अनुमान।
मन से कर मतदान तू, लोकतंत्र सम्मान।।
2.
जनता के आशीष से, जनमत की सरकार।
जागरूक मतदान हो, फैले नहीं विकार।।
3.
जनमत का आदर करे, नेता होय सुजान।
बिना लोभ सद्भाव से, कर देना मतदान।।
4.
बहुत कीमती वोट है, सोच समझ कर दान।
परचम पहरे जीत का, वोट वोट का मान।।
5.
दल भी चिंतन कर रहे, मिले जिताऊ लोग।
चिंतन कर मतदान कर, तभी मिटे भव रोग।।
6.
राजनीति के खेल में, लोकतंत्र वरदान।
लोकतंत्र के हित करो, सभी लोग मतदान।।
7.
श्वेत वसन धारण करे, तुलसी माला कंठ।
विषय भोग में डूबते, कुछ नेता आकंठ।।
8.
मतदाता कुछ सोचते, नोटा एक प्रयोग।
खारिज सबको कर रहे, राजनीति संयोग।।
9.
झंझावत भी झेलते, होते लोक चुनाव।
बागी रूठे दलों से, उनके चले मनाव।।
10.
स्वस्थ बने सरकार भी, करना एक उपाय।
सबको ही जागृत करो, मत देने को जाय।।
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बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान

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