बिलासपुर से अंजनी कुमार सुधाकर की कविता – लोकतंत्र

” लोकतंत्र ”

चरामेति चरामेति
विविधा के देश में
चरामेति चरामेति
प्रान्तर भाषायी भेष में!
चरामेति चरामेति
विकास पथ पाथेय एक
चरामेति चरामेति
अभ्युदय स्वर समवेत!
चरामेति चरामेति
भूविभारती अम्बर एक
चरामेति चरामेति
हीमालय हिन्दसागर एक!
चरामेति चरामेति
हांथ से हाथ मिला शक्ति बना
चरामेति चरामेति
पैर से पैर मिला कदम बढ़ा!
चरामेति चरामेति
वैचारिक भेद पर एक राष्ट्र चेतना
चरामेति चरामेति
जनगण में भरदो राष्ट्रप्रेम प्रेरणा!
चरामेति चरामेति
एक वायु, पानी मिट्टी भी एक है
चरामेति चरामेति
राष्ट्रवाद ही समग्रदृष्टि की टेक है!
चरामेति चरामेति व्यष्टिसमष्टि की कड़ियाँ मजबूत हों चरामेति चरामेति
मानवताधर्म की विश्वास अटूट हो!
चरामेति चरामेति
जनता का, के द्वारा, केलिए
चरामेति चरामेति
गणतंत्र फूलेफले संप्रभूता के लिए! चरामेति चरामेति
देश के विधान में तीन राष्ट्रपर्व हो
चरामेति चरामेति
स्वतंत्र गणतंत्र लोकतंत्रचुनाव का अथर्व हो! चरामेति चरामेति
रागद्वेष व्यक्तिवाद से परे परे
चरामेति चरामेति
स्वार्थ द्रोह से निर्लिप्त निडर बढ़े चलें! चरामेति चरामेति
देशअस्मिता का भान हो सर्वदा
चरामेति चरामेति
विश्वमंच पर विश्वशक्ति बन लोकतंत्र का तिरंगा फहरे सदा!

-अंजनीकुमार’सुधाकर’
बिलासपुर

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