फरीदाबाद, हरियाणा से अंजना झा की कविता –बेटी के लिए संदेश

बेटी के लिए संदेश

तुझे बिदा नहीं कर रहे इस घर से
बस
दे रहे हैं तुझे इक और आधार स्तंभ।
बेशक
पिया संग वटवृक्ष के सात फेरे लगाना
सुहाग के श्रृंगार से आभुषित होकर
पर
बिन बुलाए स्नेह का धागा लेकर भाई को
बांधने आ जाना बेहिचक चहकती हुई
क्योंकि
तुझे बिदा नहीं कर रहें इस घर से
बस
दे रहे है तुझे इक और आधार स्तंभ।
बेशक
सोलह श्रृंगार करकेअपने पिया संग
दिवाली के दीप उस देहरी पर जलाना
पर
हर होली पे आ जाना रंगों से सराबोर
कर देने हमें चूड़ियों संग खनकती हुई
क्योंकि
बिदा नहीं कर रहे हैं तुझे इस घर से
बस
दे रहे हैं तुझे इक और आधार स्तंभ।

-अंजना झा
फरीदाबाद
हरियाणा

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