Devendra Soni April 15, 2019

खामोशी भेजी है तुम्हे ..

आज कुछ खामोशी..
भेजी है तुम्हे ..
बरसो पुरानी ..
डायरी के पन्नों में..
दबी थी कही !!
आज वो खामोशी..
भेजी है तुम्हे..
कुछ अनकही सी ..
शिकायतें हैं !!
कुछ बातें भी ..
तन्हा सी !!
एक शाम भी है ..
थोड़ी बुझी सी !!
नाराजगी ..
मगर चुप है !!
कुछ दर्द भी ..
सिसकते हुए !!
एक इंतजार है ..
बरसो पुराना !!
कुछ उम्मीदें ..
बिखरी हुई !!
वो खामोशी मेरी ..
कभी फुर्सत मिले ..
गर तुम्हे !!
जिन्दगी की ..
भागदौड़ से !!
तो पढ़ना जरुर ..
जानती हूँ !!
अब जवाब ..
मुमकिन नहीं उनका !!
फिर भी ..
रखना अपने पास !!
वो खामोशी मेरी ..
जिसके आगे ..
अब वक्त भी खामोश है !!

   मौलिक – ज्योति कविश सोनी
( उदयपुर राज .)

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