चेन्नई से शशिभूषण मिश्र की रचना – कोई न कोई तो

शीर्षक: कोई न कोई तो

मेरे इर्द गिर्द रहता है कोई न कोई तो ,
वो जागता रहता है मैं सोई न सोई तो,

हर सिम्त रहमतों की भेंट बाँटता वही,
बेख़ौफ कर रहा है कोई न कोई तो,

हँसने की बात है तो हँसा खूब कीजिए,
रोया कहीं था और मैं रोई न रोई तो,

माया की दौड़ में लगा हर एक आदमी,
मैं तुमसे अलग और भी खोई न खोई तो,

दामन पे दाग़ उसने लगाकर नहीं सोचा,
क्या फ़र्क पड़ेगा अगर धोई न धोई तो,

लहज़े में तल्ख़ियाँ लिए घायल वज़ूद था,
डरता नहीं ख़ुदा से भी कोई न कोई तो,

रह रह के थाम लेता है अब हाथ वो मेरा,
उसको भी डर सता रहा कोई न कोई तो,
—शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’
चेन्नई

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1 Comment

  1. आदरणीय देवेन्द्र सोनी जी संपादक युवा प्रवर्तक को हृदयतल से अनंत आभार ।।आपने मेरी रचना को स्थान एवं सम्मान देकर कृतार्थ किया है ।

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