Devendra Soni March 21, 2019

बस तुम्हारे लिए…

अधूरी सी रह जाती
कविता मेरी
जो तुम… मानस में न होते
शब्दों में उतरता कौन……??

ठीक वैसा ही
जैसे चाँद आसमान में तो हो
पर बादलों में छुप जाए
देर तक रहे मौन !!!

अधूरी सी रह जाती
कविता मेरी
जो तुम… पास में न होते
एहसास में मुझे महसूसता कौन …???

ठीक वैसे ही
जैसे देह चलायमान तो हो
पर चलती साँसों का
अस्तिव हो गौण !!!

#विश्व_हिंदी_कविता_दिवस_पर_उपहार
बस तुम्हारे लिए……*कविते*

दीपा एम खेतावत
जोधपुर, राजस्थान

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