दरभंगा से पिंकी की कविता – होली पी संग

**होली पी संग **

⚜नीला, पीला ,हरा ,गुलाबी ,
जीवन का नव रस रंग।
रंग जाऊं मैं पी के अंग संग। . . सज सवर कर पी संग झुमू। सोलह श्रृंगार में नवरस डूबे। करूं इतना दिव्य प्रेम की साजन
मंत्रमुग्ध होकर रह जाए दंग ।
रंग डाले वो मेरा अंग-अंग।
होली का रंग प्रीत अमर है। जीवन का संगीत अमर है । इस होली के पावन क्षण में रंग जाऊं पीके रंग ।
रंग डाले वो मेरा अंग-अंग। यौवन उपवन ।
उपवन जीवन मधुबन रंग बसंत ।
फागुन के इस मौसम में पी संग झूमेंगे ,
नाचेंगे, गायेंगे कर -लव के संग यौवन करें हूड़दंग।
रंग डाले वो मेरा अंग-अंग।
डट के होली खेलूंगी ऐसा
साजन हो जाए मस्त होली मगन।

– पिंकी,दरभंगा

Please follow and like us:
0

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*