कानपुर से हमीद कानपुरी की ग़ज़ल- है अजब सबका हाल होली में

ग़ज़ल

है अजब सबका हाल होली में।
रंग से लाल गाल होली में।

करते फिरते धमाल होली में।
बदली बदली सी चाल होली में।

फिर न हों कुछ बवाल होली में।
हों अगर खुश खयाल होली में।

खूब गोरा था तन बदन उनका,
हो गयी लाल खाल होली में।

आज मौसम हँसी ठिठोली का,
मर्जे़ नफरत न पाल होली में।

हो न माहौल बदनुमा हरगिज़,
कीजिये देख भाल होली में।

खूब करना हँसी ठिठोली सब,
कुछ न रखना मलाल होली में।

खुशनुमा हरतरफ फज़ा दिखती
उसमें मट्ठा न डाल होली में।

हमीद कानपुरी

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