नई दिल्ली से सोनिया थपलियाल की कविता – होली रे…!!

होली रे…!!

रंगों के सागर में
डूबी है मस्तानों की
टोली रे
गूंजें हर स्वर
एक लय में
आज मनाये
होली रे..!!

भांति-भांति के
रंग है बिखरे
राष्ट्र रंगा हर रंग में है
प्रेम,सद्भावना और बलिदान का
रंग चढ़ा हर
जन में है

राष्ट्रवाद का रंग
चढ़ा है आज देश के
वीरों पर
केसरिया रंग
दमक रहा है
शेरों की शमशीरों पर

शत्रु को भी
रंगने की ठानी
भारत के इन धीरो ने
गूंजें हर स्वर
एक लय में
आज मनाये
होली रे..!!

सोनिया थपलियाल

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