झारखंड से अंनत ज्ञान की कविता – प्रेम का ऐसा रंग लगा दो

एक होली पर रचना है :-

*प्रेम का ऐसा रंग लगा दो..*

*प्रेम का ऐसा रंग लगा दो,*
जो छूट न पाऐ किसी होली में,
आपस में कभी तकरार न हो ,
प्रभु ऐसी कृपा दो झोली में,

साथ रहें सब वैसे ही मिलकर,
जैसे सात रंग हो रंगोली में,
*प्रेम का ऐसा रंग लगा दो*
जो छूट न पाऐ किसी होली में,

सौहार्द टपके इंसानों की बोली में,
क्या रखा है मित्रों, बारूद व गोली में,
*इसलिए, प्रेम का ऐसा रंग लगा दो*,
जो छूट न पाए किसी होली में,

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
आओ आज सभी एक टोली में,
*और प्रेम का ऐसा रंग लगा दो,*
जो छूट न पाए किसी होली में,

देश के हर अभिनंदन पर शान हो हमें,
गर्व हो साईना, मैरिकॉम, कोहली में,
*प्रेम का ऐसा रंग लगा दो*,
जो छूट न पाए किसी होली में,

भारत माता की हम ऐसी तस्वीर बनाऐं,
जैसे सजी हुई दुल्हन बैठी हो ड़ोली में,
*तो चलो, प्रेम का ऐसा रंग लगा दो*,
जो छूट न पाए किसी होली में,

– अनंत ज्ञान, झारखंड

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