बांदीकुई,राजस्थान से डॉ. एन के सेठी की रचना – उमंग

मनहरण घनाक्षरी छन्द

उमंग

उड़े फागुन के रंग
मन मे भरी उमंग
खेले बंधुओ के संग
गुलाल उड़ाइये।।

पीकर ठंडाई भंग
मस्ती में बजाए चंग
मिलजुल खेलें सभी
उमंग बढाइये।।

दिल में उमंग उठी
चाल हुई अटपटी
रागद्वेष भूलकर
रंग बरसाइये।।

अंखिया रही है बोल
खुशियां रही है घोल
तन मन उमंग है
प्रेमरंग पाइए।

साँस भरी चंदन है
होली का वंदन है
उमंगों से स्पंदन है
प्रेमगीत गाइये।।

अंग अंग रस घोले
चंचल मनवा डोले
उमंग से भरकर
रंग बरसाइये।।

दुनिया रंग रंगीली
झूमे मस्तानो की टोली
फागुन के महीने में
उमंग बरसाइये ।।

प्रीतम के रंग रंगी
मिलन कीआस जगी
उमंग में भरकर
अबीर उड़ाइए।

©डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)

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