झुंझुनूं ,राजस्थान से अनूप सैनी की कविता – लोकतंत्र का पर्व

——–कविता—–

लोकतंत्र का पर्व

आ गया है
लोकतंत्र का महापर्व
अब जातियां लड़ेंगी चुनाव
धर्म बनेगा ध्वजवाहक
लोकतंत्र का
वोट मांगे जाएंगे
मन्दिर-मस्जिद के नाम पर
स्वर्ण-दलित कार्ड खेले जाएंगे
रुपये की माया मंडेगी
नेता,पार्टी,कार्यकर्ता
वोट सब कुछ खरीदे जाएंगे
पैसे लगा कर भीड़ जुटा कर
लोगों को भरमाया जाएगा
वादों की,नारों की बौछारें लगेंगी
लगेगी नेताओं की काँव काँव और
दलालों की किस्मत खुलेगी
गाड़ियां दौड़ेगी सरपट धूल उड़ाती
ईमान बिकेंगे सुरा और सुंदरी पर
बड़े बड़े सदाव्रत बंटेंगे
हर चीज की बंदरबांट मचेगी
और तुम….
दूर खड़े होकर ये तमाशा देखो चुपचाप
क्योंकि अगर तुमने
विकास की,भ्रष्टाचार,महंगाई, रोजगार,सड़क,सुविधाओं की बात की
तो तुम….
सेक्युलर, देशद्रोही और
अलोकतांत्रिक करार दे दिये जाओगे
©®मौलिक एवं अप्रकाशित

– अनूप सैनी ‘बेबाक़’
झुंझुनूं,
हिंदी व्याख्याता
राज. सरकार

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