जोधपुर से दीपा एम शेखावत की कविता – तुझसे होकर..

तुझसे होकर

तुझसे होकर
देखती हूँ जब अक्स मेरा
हर बार
आईना ओढ़ता है
सतरंगी…झिलमिल आँचल,
शरबती साँसों से होता
इतर इतर,
उष्मित आँखों से
पिघलता,
स्मित ओठों के
किनारे
मिलते जब
गुलाबी गालों से
हया के सिंदूरी रंग में
गुलमोहर सा
झरता,
नशीले होते
पलकों के शामियाने
झुकी नज़रों के
इशारों पर
बेहिसाब लरजता,
मिलन की
उमंग लिए हुस्न ‘गर
सँवरने लगे
यौवन की अंगड़ाई
में लिपटता ….सिमटता !!

तुझसे होकर
घुलता है जब इश्क़ मेरा
कायनात का
कोना कोना रूह में उतरता

– दीपा एम शेखावत दीप
जोधपुर

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