महासमुंद से महेश राजा की लघुकथा – नारी तुम केवल श्रद्धा हो

लघुकथाः
नारी तुम केवल श्रद्धा हो

…और आज की हमारी विनर है,कुसुम दीप जी।आफिस कार्य के परफॉर्मेंस और गायिकी मे अव्वल कुसुम जी हमारे विभाग की शान है।उन्हें पुरस्कृत कर हम स्वयं गौरन्वित हो रहे है…तालियों की गडगडाहट से कमरा गूंज उठा।
मम्मी….मम्मी… उठो न।देखो मेरी शनिवार वाली वाईट ड्रेस और मौजे नहीं मिल रहे…….वह हडबडाकर उठी।स्वप्न अच्छा था।पर वास्तविकता बडी दुःखद थी।देर तक सोयी।मीता स्कूल जाने को उतावली थी।राजू भी उठा न था।सब की चाय,टिफिन और मां की दवाईयां।वह भागी,उसके भीतर एक अनोखी शक्ति आ गयी।
.आधे घंटे मे सब ठीक कर बच्चों को विदा कर अपनी काफी लेकर मां के कमरे मे आयी।काफी दिनों से बीमार थी मां।उससे जो बन पडता था,उतनी सेवा वह कर ही रही थी।दो अनाथ लडकियों को भी पाला था।पढाई करती ,उसके आफिस जाने के बाद मां का ख्याल रखती।पर वे भी बडी होकर एक एक कर चली गयी।
उसने घडी की तरफ देखा 8.30,बाबा रे।आफिस भी जाना है तैयार होना है।फिर मां को नहलाना,नाश्ता कराना.दोपहर के भोजन की तैयारी टिफिन आदि।
उसने मां की तरफ निरीह नेत्रो से देखा।मां ने आंखों ही आंखो के ईशारे से उसे ढाढस दी।अगले सप्ताह ,सलाहकार समिति की बैठक है,सब कुछ उसे ही करना है।कैसे कर पायेगी अकेले।
जल्दी जल्दी नहा कर पूजाघर मे मौन बैठी,हे परम पिता….अब थक गयी हूं. मुझसे अब और नहीं हो पा रहा।ईश्वर की मूरत हमेशा की तरह उसे आशीष मुद्रा मे ही दिखी।
कल महिला दिवस था।कितना आनंद उठाया।आफिस मे भी खूब तारीफ हुई।भोजनादि हुआ।कितनी खुश थी वह….फिर सोचा आज से फिर वही जिम्मेदारी।।कभी कभी ऊब भी लगती है,फिर लगता है,यही जीवन है।
तैयार होकर मां को सब कुछ समझा कर पडौस की आंटी को मां का ख्याल रखने को कह कर वह अपने कर्तव्य पथ पर चल पडी.एक नये जोश मे,एक नयी उमंग लिये।मधुजी से कह कर मां की देखभाल हेतू नर्स या किसी लडकी की व्यवस्था भी करनी है।
उसने चेहरे पर मुस्कान लिये स्कूटी स्टार्ट की।आखिर नारी शक्ति भी कोई चीज हैं।

*महेश राजा*
वसंत 51,कालेज रोड।
महासमुंद।छत्तीसगढ़।।

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1 Comment

  1. राजा जी लघुकथा के राजा हैं ।
    वाह बहुत खूब ।

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