आगरा से सर्वज्ञ शेखर का लेख – *क्या है जिनेवा संधि ?

*क्या है जिनेवा संधि ?*

पाकिस्तान ने 27 फरवरी को भारतीय सैन्यप्रतिष्ठानों पर हवाई हमले की नाकाम कोशिश की थी, उस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाक के एफ 16 लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया, और एक एफ 16 विमान को मार गिराया। इस दौरान हमारा एक मिग-21 नष्ट हो गया और विंग कमांडर अभिनंदन लापता हो गए ।
पाकिस्तान ने दावा किया कि अभिनंदन उनके कब्जे में हैं और उनके कुछ फोटोज व वीडियो भी जारी किए।

विंग कमांडर अभिनंदन के विडियो को पाकिस्तान ने सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया, जो जिनेवा संधि का खुला उल्लंघन है। अभिनंदन उन सभी अधिकारों के हकदार हैं, जो जिनेवा संधि के तहत प्रिजनर ऑफ वॉर (PoW) यानी एक युद्धबंदी को मिलती हैं। युद्धबंदी के साथ किस तरह का व्यवहार होना चाहिए, इसके बारे में 1949 की जिनेवा संधि साफ-साफ कहती है कि यह उन सभी मामलों में लागू होती है, चाहे घोषित युद्ध का मामला हो या नहीं।

जिनेवा संधि के तहत पाकिस्तान भारत के पायलट को नुकसान नहीं पहुंचा सकता । युद्धबंदियों के अधिकारों को बरकरार रखने के जिनेवा संधि (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं । जिनेवा संधि में चार संधियां और तीन अतिरिक्त मसौदे शामिल हैं, जिसका मकसद युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना है ।

मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी और तीसरी संधि 1906 और 1929 में हुई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी । इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जेनेवा समझौते में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं । इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं । साथ ही समझौते में युद्ध क्षेत्र में घायलों की उचित देखरेख और आम लोगों की सुरक्षा की बात कही गई है । जिनेवा संधि में दिए गए अनुच्छेद 3 के मुताबिक युद्ध के दौरान घायल होने वाले युद्धबंदी का अच्छे तरीके से उपचार होना चाहिए ।

युद्धबंदियों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए । उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए । साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होगी । जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता । इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता । इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है । इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है । कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता । युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है ।

जिनेवा संधि से जुड़ी मुख्य बातें ये हैं –

– इस संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है ।

– संधि के तहत उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है ।

– इस संधि के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता ।

– किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है. (फिर चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष) ।

-संधि के मुताबिक युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता ।
– युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता ।

यद्यपि भारतीय युद्धबंदियों के साथ पाकिस्तान के व्यवहार का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। 1999 के करगिल युद्ध के दौरान इंडियन एयरफोर्स के पायलट अजय आहूजा अपने विमान से सुरक्षित कूद चुके थे। भारत का दावा है कि पाकिस्तानी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी। इसी तरह एक और पायलट नचिकेता को भी पाकिस्तानी सेना ने अगवा कर लिया था। हालांकि, बाद में जिनेवा संधि को लेकर भारत के दबाव के बाद पाकिस्तान को आखिरकार 8 दिनों बाद नचिकेता को भारत को लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा था ।

पाकिस्तान को विंग कमांडर अभिनंदन को हर हाल में छोड़ना ही होगा, क्योंकि पाकिस्तान ने भी जिनेवा संधि पर दस्तखत किए हैं।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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