आगरा से सर्वज्ञ शेखर का आलेख – एम एफ एन को पाकिस्तान से वापस लेना : देर से लिया गया सही कदम

एम एफ एन को पाकिस्तान से वापस लेना : देर से लिया गया सही कदम

पुलवामा में भीषण आतंकवादी हमले में 42 सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद भारत ने पाकिस्तान को दिया ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN)’ का दर्जा वापस ले लिया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई ‘कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी’ में पाकिस्तान को मिले इस दर्जे को 22 वर्षों बाद खत्म करने का फैसला किया गया। दो देशों के बीच होने वाले ‘मुक्त व्यापार समझौते’ के तहत एमएफएन का दर्जा दिए जाने का प्रावधान है। एमएफएन एक आर्थिक दर्जा है जो एक देश किसी दूसरे देश को देता है या दोनों देश एक-दूसरे को देते हैं। कोई देश जिन किन्हीं देशों को यह दर्जा देता है, उस देश को उन सभी के साथ व्यापार की शर्तें एक जैसी रखनी होती हैं। जिन देशों को एमएफएन का दर्जा दिया जाता है, उन्हें व्यापार में बाकियों के मुकाबले कम शुल्क, ज्यादा व्यापारिक सहूलियतें और उच्चतम आयात कोटा की सुविधा दी जाती है।

व‍िश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश (एमएफएन) का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा दिए जाने पर देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि उसे व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था। पाकिस्‍तान को जब यह दर्जा मिला तो इसके साथ ही पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा देने के साथ और उत्‍पादों को कम ट्रेड टैरिफ पर बेचे जाने की छूट मिलती है। बता दें कि भारत की ओर से पाक को दिया गया यह दर्जा एकतरफा है। पाकिस्तान ने भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया है। पाकिस्तान ने वर्ष 2012 में भारत को एमएफएन यानी विशेष तरजीह देश का दर्जा देने का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक वो वादा नहीं निभाया है।
डब्‍लूटीओ के आर्टिकल 21 बी के तहत कोई भी देश तब किसी देश को दिया मोस्‍ट फेवर्ड नेशन का दिया गया दर्जा वापस ले सकता है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दे पर विवाद हो। पर डब्‍लूटीओ के नियम के मुताबिक किसी भी देश को दिया गया एमएफएन का दर्जा वापस लेने के लिए सारी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इससे पहले इस डब्‍लूटीओ के नियम को अमेरिका ओर निकारगुआ के बीच हुए विवाद वर्ष 1983 और 1985 में और यूरोपियन कम्‍युनिटी और युगोस्‍लाविया के बीच वर्ष 1992 में लगाया गया था।

एमएफएन स्टेटस का इस्तेमाल लोन अग्रीमेंट और कमर्शल ट्रांजैक्शन में भी होता है। लोन अग्रीमेंट के तहत किसी एमएफएन दर्जा प्राप्त देश के लिए तय ब्याज दर से कम दर किसी सामान्य देश को ऑफर नहीं किया जाएगा। वहीं, कमर्शल ट्रांजैक्शन के मामले में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा प्राप्त देश से सस्ती डील किसी दूसरे देश को नहीं दी जाएगी।

छोटे और विकासशील देशों के लिए एमएफएन स्टेटस कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है। इससे उनकी बड़े मार्केट तक पहुंच बनती है और उन्हें सस्ते में वस्तुएं आयात करने का मौका मिल पाता है जबकि निर्यात की लागत भी कम हो जाती है क्योंकि उन पर बाकियों के मुकाबले कम शुल्क वसूले जाते हैं। इससे छोटे देशों को भी निर्यात के मोर्च पर बड़े देशों से मुकाबला करने में मदद मिलती है।

भारत का पाकिस्तान के साथ निर्यात ज्यादा, आयात कम होता है। यानी, भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में होता है। अब पाकिस्तान से एमएफएन स्टेटस छिनने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को झटका लगना तय माना जा रहा है। संदेह यह भी है कि पाकिस्तान भारत से व्यापार पूरी तरह खत्म ही कर दे। पाकिस्तान को जो नुकसान हो, लेकिन भारत को भी कोई आर्थिक फायदा नहीं होने वाला, उल्टा नुकसान ही होगा। हालांकि, आतंकवाद जैसे घृणित एवं अमानवीय कृत्यों पर लगाम लगाने का पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक नफा-नुकसान पर बहुत विचार नहीं किया जा सकता। भारत को जो थोड़ा बहुत नुकसान होने की संभावना है वह शहीदों की जान की कीमत से बहुत कम है । राष्ट्रहित में कड़वे और कठोर कदम लेने ही होते हैं ।

उरी हमले के बाद भी भारत पर पाकिस्तान से एमएफएन का दर्जा छीनने का दबाव बना, लेकिन तब भारत सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया था। भले ही देर से ही सही पर यह यथोचित कदम है ।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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