आगरा से सर्वज्ञ शेखर का आलेख – यह भारत पर आक्रमण है

यह भारत पर आक्रमण है

मुठ्ठियाँ क्रोध से भिंच रहीं हैं, आंखों में खून सा उतर रहा है, भारत माता अपने 44 वीर सपूतों की शहादत पर रो रही हैं । माँ को रोते देख बच्चों का विचलित हो जाना स्वाभविक है । देश के बच्चे बच्चे की आंखों में आंसू हैं ।

पाकिस्तान समर्थित कायर आतंकियों द्वारा एक साथ इतने जवानो को शहीद कर देना निश्चित रूप से जघन्य है । सारे देश और शासन प्रशासन को इस दुस्साहसिक घटना ने झकझोर कर रख दिया है । यह हमला काश्मीर के पुलवामा पर नही बल्कि भारत की प्रभुसत्ता पर है और सरकार को इसी रूप में लेना चाहिए और उसी प्रकार बदला भी लेना होगा ।

हम इस दुखद घटना की घोर निंदा करते हैं, सारे शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और उनके शोक संतप्त परिजनों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हैं । इस घटना पर कोई राजनीति नही होनी चाहिए न सुरक्षा व्यवस्था पर कोई प्रश्नचिन्ह लगाना चाहियें । सेना हमेशा सजग सतर्क रहती है, बिना निरुत्साहित हुए आक्रामक ही रहना होगा ।

सीआरपीएफ काफिले पर हुआ यह आत्मघाती हमला अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है।

पुलवामा में आतंकी दस्तक का 10 दिन में ये तीसरा मामला है। बृहस्पितवार, 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर कार सवार आतंकी ने आत्मघाती हमले में कार में विस्फोट कर इस हमले को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि धमाका इतना जबरदस्त था कि काफिले में चल रहे कई वाहन इसकी चपेट में आ गए हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इससे पहले 12 फरवरी को भी सुरक्षा बलों की पुलवामा जिले के रतनीपुरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने एक आतंकी को मार गिराया था। हालांकि मुठभेड़ के दौरान एक जवान भी शहीद हो गया था, जबकि एक अन्य जवाब गंभीर रूप से घायल हुआ था। इससे पहले 06 फरवरी को भी पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक स्वयंभू जिला कमांडर मारा गया था।

इससे पहले वर्ष 2016 में आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के ही उड़ी सेक्टर में भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर बड़ा हमला किया था। उरी हमले में भी 18 सैनिक शहीद हुए थे। उड़ी से पहले दो जनवरी 2015 को भी आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर बड़ा हमला किया था, जिसमें सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जबकि 37 घायल हो गए थे। इस हमले ने एक बार फिर उरी और पठानकोट हमलों की यादें ताजा कर दी।

इस आत्मघाती हमले ने देशभर में सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस हमले के बाद जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। मालूम हो कि भारतीय खुफिया एजेंसियां पिछले कुछ महीनों से आतंकी हमलों को लेकर लगातार अलर्ट जारी कर रही हैं। खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर सुरक्षा एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2019) से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर व दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से 10 से ज्यादा संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था।

यद्यपि उड़ी और पठानकोट हमलों के बाद देश के भीतर सेना और अर्धसैनिक बलों ने हर आतंकी वारदात का मुंहतोड़ जवाब दिया है। यही वजह है कि इन हमलों के बाद आतंकियों के हर मंसूबे नाकाम हुए हैं। सुरक्षा बलों ने केवल जम्मू-कश्मीर में ही 2018 में तकरीबन 230 आतंकियों को मारने में सफलता प्राप्त की है। सुरक्षा बलों की इस कार्यवाही का ही नतीजा है कि आतंकी घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले को पिछले महीने आतंकवाद मुक्त जिला घोषित किया गया था।

इससे पहले चार आतंकियों ने 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में एलओसी के करीब स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर सुबह साढ़े पांच बजे फिदायीन हमला किया था। इस हमले में 18 जवान शहीद हुए थे। सेना ने जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकियों को भी मार गिराया था। उड़ी हमले को 20 साल में भारतीय सेना पर किया गया, सबसे बड़ा हमला बताया गया था। भारत ने पाकिस्तान सीमा में घुसकर आतंकियों के ठिकाने पर सर्जिकल स्ट्राइक कर इस हमले का बदला लिया था। इसी घटना पर ‘उरीः द सर्जिकल स्ट्राइक’ फिल्म भी बनी है।

उड़ी हमले से पहले 02 जनवरी 2016 को सुबह साढ़े तीन बजे पठानकोट एयरबेस पर भी आतंकी हमला हुआ था। इस आतंकी हमले में छह आतंकवादी शामिल थे। आतंकी हमले के बाद 65 घंटे तक चले सेना के ऑपरेशन में सभी आतंकवादियों को मारा गिराया गया था। हालांकि, इस हमले में देश के सात वीर जवान शहीद हो गए थे और 37 जवान घायल हुए थे। बताया जाता है कि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला करने वाले आतंकियों ने दिसंबर 2015 में पाकिस्तान से भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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