हास्य-व्यंग्य

Devendra Soni May 23, 2020

व्यंग्य ऑनलाइन: तब और अब -कमलेश व्यास ‘कमल’ सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने एक डायलॉग किसी फिल्म में बोला था जो इस प्रकार है – “हम जहाँ खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है।” सोचो अगर यही डायलॉग समर्थ अभिनेता ए. के. हंगल साहब ने बोला होता तो कैसा लगता..? खैर …बात […]

Devendra Soni May 22, 2020

हास्य व्यंग्य:- ” धीरे का झटका जोर से लगा” बब्बन भिया को शायरी करने का शौक बचपन सेज था। किसी ने कुछ कहा कि उसका जवाब शायरीज में देते । बचपन की शायरी से कारोबार चालू हुआ ,तो गल्ली,मोहल्ले के,निठल्लों के हीरो हो गए बब्बन भिया । बचपन सेज रोमेंटिक रहे बब्बन भिया । चलना […]

Devendra Soni May 19, 2020

लघु व्यंग्य *विदेशी सोफ़े की अकड़* बिग बाज़ार में देसी-विदेशी सोफा-सेट की प्रदर्शनी लगी हुई थी, जिसकी चर्चा गली-मुहल्ले से लेकर ऑफिस तक सभी जगह थी। चर्चा सुनकर हमने भी छुट्टी के दिन बिग बाजार की सैर का मन बना लिया और रविवार को सुबह जल्दी ही घर से निकल पड़े, ताकि भीड़ कम हो […]

Devendra Soni May 15, 2020

व्यंग्य फेक न्यूज आज का समय स्व संपादित सोशल मीडीया का समय है . वो जमाने लद गये जब हाथ से कलम घिसकर सोच समझ कागज के एक ओर लिखा जाता था . रचना के साथ ही स्वयं का पता लिखा लिफाफा रचना की अस्वीकृति पर वापसी के लिये रखकर , संपादक जी को डाक […]

Devendra Soni May 6, 2020

निमाड़ी हास्य व्यंग्य:- इश्क चक्कर, एम्बुलेंस के अंदर अजब गजब हे ,यो प्रेम को चक्कर,जो खाय तो मजो आये,न खाए,तो दूसरों खा जाय । बब्बन जवां ठहरो,बब्बन की पड़ोसन तो और भी परी हे । बब्बन और परी को आँखन-आँखन में माखन खानु हो गेयो । एक दूसरे से बात करे तो करे कैसे, दोनों […]

Devendra Soni May 3, 2020

व्यंग्य- “अतिथि! तुम कब आओगे…?” – कमलेश व्यास ‘कमल’ कैफ़ भोपाली साहब की एक ग़ज़ल का मतला है- “कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा।” वर्तमान परिस्थिति में कमोबेश यह स्थिति हमारे देश सहित लगभग पूरे विश्व की है…! मेहमान,अतिथि तो क्या आस-पड़ोस वाले भी आकर अभी दरवाज़ा नहीं […]

Devendra Soni May 1, 2020

हास्य पत्र ****** पता- स्वर्ग लोक केयर/ऑफ त्रिलोकी नाथ ******* आदरणीय चित्र गुप्त महाराज जी, सादर प्रणाम , आप कैसे हैं ,आपके काम काज ,दिनचर्या सब कैसी चल रही है?हम सभी पृथ्वी वासी जिसे “मृत्यु लोक “कहते हैं बहुत मुसीबत में हैं । ना चैन से जी रहे ना मर रहे । हमें यहां लॉक […]