कथा – कहानी

Devendra Soni January 17, 2020

आन इमरजैंसी ड्यूटीःमहेश राजा पास से एक सरकारी जीप तेज गति से गुजर गयी,जिस पर लिखा था-“इमरजेंसी शासकीय ड्यूटी पर.” आगे जाकर सरकारी जीप संदीप चाट वाले की दुकान पर रूकी।हम पीछे पीछे ही थे।हम सबने देखा,कि जीप से साहब की बीवी,बच्चे और मेहमान उतरे और चाट वाले ठेले पर आ डटे।उन्होंने अपनी पसंद से […]

Devendra Soni January 15, 2020

कहानी…. ..रिश्तो का चक्रव्यूह आज बैसाखी का दिन है,फसले कटकर मंडी मे पहुंचने को तैयार।कुछ लोग बैसाख पूजा मे मगन। ऐसे शुभ मुहर्त को देखते हुऐ माया अपने बेटे की शादी मे होने वाले रीति रिवाजो को बडी खुशी से करने मे लगी है, उससे चला नही जाता पर थोडा लगड़ाकर ही सही। शेरवानी मे, […]

Devendra Soni January 12, 2020

बचपन के मित्र(लघुकथा) मानसिक समस्याओं से घिरी सविता अनमने मन से भोजन बनाने में लगी थी। सोच रही थी कि हृदय की टीसती वेदना किससे कहें, तभी तनु का फोन आया। तनु से बातें कर सविता सारे दु:ख भूल गयी। कितनी समस्याओं के समाधान उसे बातों ही बातों में मिल गए क्योंकि बचपन के अभिन्न […]

Devendra Soni January 11, 2020

राजनीति बनाम कूटनीति:महेश राजा दोपहर हो गयी थी।चुनाव संचालक सियार भूख के मारे आँते एंठ रही थी।व्याकुल सियार ने मुख्य प्रत्याशी शेरसिंह से कहा,-“दादा,बडी भूख लगी है।ऐसा कब तक चलेगा?अब तो शिकार करने की छूट दे दिजिये?” शेर सिंह ने भूखे सियार की पीठ थपथपाई,-“बावले।कुछ दिन सब्र कर।शाकाहारी बनने की आदत डाल।अरे,शाकाहारी से याद आया,गरीबों […]

Devendra Soni January 6, 2020

मीत मेरे बचपन के आज इतने बरसो के बाद उसे देख मैं दंग रह गया।किसी काम मे मैं इधर आफिस मे आया था उसे आ ई पी एस आफिसर की कुर्सी पर बैठा देख हैरान था।बिल्कुल भी नही बदली थी,अपितु पद के रुआब से और सुन्दर हो गयी थी।उसे देख कर मेरी जुबान लगा रास्ता […]

Devendra Soni January 2, 2020

लघुकथा .. *** प्रेम*** कभी कभी मैं ये सोचकर बडी खुश होती मेरे दोनो बच्चे अच्छे -अच्छे ओहदे पर, अपनी – अपनी नौकरी मे खुश हैं, उनका अपना परिवार है दोनो बेटा बेटी अपनी गृहस्थी मे मगन है,ठीक तो है जिनको इतनी मेहनत से पाला पोसा,अब वो मेरे पास तो नही रह सकते,उन्हे जीवन मे […]

Devendra Soni January 2, 2020

समझौता:महेश राजा आफिस के सामने दो कुत्तै लड़ रहे थे।दोनों एक दूसरे पर झपटते तो लगता ,जैसे अपने प्रतिद्वंद्वी को नोच खायेंगे। एक सज्जन यह तमाशा देख रहे थे।अचानक उन्हें कुछ याद आया।उन्होंने अपनी बेग से पारले जी का एक पैकेट निकाला और कुत्तों के सामने फेंक दिया। दोनों कुत्ते पैकेट पर झपटे।लडाई बंद कर […]

Devendra Soni December 30, 2019

समझदार बिटिया कान मेँ ईयरफोन लगे हुए ही बस से उतर चुकी एक बिटिया को मीना समझाया, “देखो रास्ते मेँ ईयरफोन कान मेँ लगाकर नहीँ चलना चाहिये ,दुर्घटना हो सकती है ।बातचीत या गाना सुनने पर माइंड डाइवर्ट होता है ,पीछे से आ रही गाड़ी की आवाज नहीँ आती ।” बिटिया बोली , “आंटी! ये […]

Devendra Soni December 28, 2019

*उड़ने को आसमान* जाती हुई ठंड की शाम थी वह। दिन पर कुहासा अभी भी जल्दी छा जाता था। शाम होती तो थी लेकिन फिसल कर तुरंत ही रात में बदल जाती थी। एक हाल नुमा कमरे में कुछ लोग मिलकर कविताएं पढ रहे थे। एक का हाथ जब दूसरे की पीठ पर पडता तो […]

Devendra Soni December 27, 2019

कैक्टस के फूल क्रिसमस की पार्टी का आनंद कॉलोनी के बूढ़े-बच्चे उठा रहे थे। स्वाभाविक है जहाँ धूँआ वहाँ आग होगा ही ,ठीक उसी तरह सबकी चर्चा का केंद्र धरा थी , क्योंकि धरा इस पार्टी में शामिल नहीं हुई थी । मानवीय संवेदनाओं से लबरेज कभी आँसू कभी शुष्क होठों पर अपना जीभ फिरा […]